Mere chhote balam sa ki sanak
एक छोटा सा घर दुल्हन की तरह सजा हुआ था। जहाँ शादी में चहल-पहल होती है, वहीं इस शादी के घर में एकदम सन्नाटा पसरा हुआ था। किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि एक शब्द भी बोल दे। शादी के मंडप पर एक दुल्हन बैठी हुई थी जिसने घूंघट किया हुआ था। उस लड़की की पकड़ अपने लहंगे पर कस गई थी, लेकिन उसने एक शब्द भी नहीं कहा था। आसपास खड़े लोग उस दुल्हन को देख रहे थे। किसी के होंठों पर मज़ाक वाली मुस्कुराहट थी तो कोई दुखी था। पंडित जी भी किनारे बैठे हुए थे और घबराए हुए थे। और कई लोग तो अपने हाथ में बंदूक लिए खड़े थे।




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