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"fight"

आर्या जल्दी से खड़ी हो गई, उसका पूरा चेहरा लाल था। उसने वरदान को देखकर गुस्से से अपने पैर को पटका और तुरंत रेस्टोरेंट से बाहर भाग गई। 

सिया भी उसके पीछे चली जाती है। वरदान आर्या की पीठ को तब तक देखता रहा, जब तक आर्या उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गई।

वरदान बहुत गुस्से में था, उसकी आँखों से ही पता चल रहा था कि वह इस चीज़ का बदला ज़रूर लेगा।

 वरदान तुरंत वहाँ से चला जाता है। जब वह एक प्राइवेट रूम में पहुँचता है, तो वहाँ पर पहले से ही दो आदमी मौजूद थे। 

एक आदमी की उम्र लगभग 25 साल थी और दूसरे आदमी की उम्र लगभग 36 साल थी।

उन दोनों की ही शक्ल थोड़ी-थोड़ी वरदान जैसी लग रही थी, जिससे साफ़ पता चल रहा था कि एक वरदान का छोटा भाई है और एक बड़ा भाई। 

वरदान को इतने गुस्से में देखकर उन दोनों ने एक-दूसरे को देखा। फिर पहले वाले आदमी ने पूछा, "बड़े भाई, क्या हुआ? आप इतने गुस्से में क्यों हैं?"

वरदान गुस्से से अपनी सीट पर बैठते हुए वाइन का ग्लास उठा लेता है, मगर उसने एक शब्द भी नहीं कहा। वरदान एक झटके से ही ग्लास की सारी वाइन पी जाता है। 

फिर उसने अपनी ठंडी नज़रों से अपने छोटे भाई को देखा, तो उसका छोटा भाई हकलाते हुए बोला, "कोई बात नहीं, अगर आप नहीं बताना चाहते तो हमें नहीं जानना।"

वरदान ने अपने छोटे भाई को अनदेखा करते हुए अपने बड़े भाई को देखकर भारी आवाज़ में पूछा, "मुझे क्यों बुलाया है?" 

वरदान के बड़े भाई ने बिना भावों के उसे देखा, फिर भारी आवाज़ में बोला, "तुम घर कब वापस आ रहे हो?" 

वरदान कोई जवाब नहीं देता है। उसकी आँखों के सामने अभी भी आर्या का चेहरा था। वह आर्या से बदला लेना चाहता था।

उसके बड़े भाई ने फिर से सवाल किया, "मुझे जवाब चाहिए, तुम घर कब वापस आ रहे हो?"

 वरदान गुस्से से वाइन के ग्लास को ज़मीन पर फेंक देता है। फिर खड़े होकर बोला, "बेहतर होगा मुझे वह काम करने पर मजबूर नहीं करो जो मैं नहीं करना चाहता हूँ, वरना अगर मैंने कुछ गलत कर दिया तो फिर मत कहिएगा कि मैंने आपको वॉर्निंग नहीं दी थी।" इतना कहते ही वरदान वहाँ से चला जाता है।

उसके जाने के बाद पूरे प्राइवेट रूम में सन्नाटा पसरा हुआ था। कोई कुछ भी नहीं बोला। 

वरदान रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर सिगरेट निकालकर उसे अपने होठों के बीच दबा देता है और धीरे-धीरे कश लेते हुए अपने गुस्से को शांत करने लगा।

आज रात आर्या बहुत ही अच्छी नींद सोई थी। अगले दिन रघुवीर जी उसे कॉलेज नहीं जाने देना चाहते थे, मगर आर्या ज़िद करके कॉलेज गई।

आर्या क्लासरूम में बहुत ही खुश होकर बैठी थी। सिया घबराई हुई आवाज़ में बोली, "आर्या, तुमने ये अच्छा नहीं किया है।"

आर्या उसकी बात को अनदेखा करके बोली, "मुझे पता है मैंने जो कुछ किया है, बहुत अच्छा किया है। खड़ूस प्रोफेसर को सबक सिखा कर रहूँगी।" 

कुछ देर बाद बेल बजी, जिसके बाद वरदान बिना किसी भाव से अपने हाथ में एक बुक लेकर क्लासरूम में प्रवेश करता है। उसने बुक को टेबल पर रख दिया और ग्रीन बोर्ड पर कुछ लिखने लगा।

थोड़ी देर बाद वरदान एक क्वेश्चन ग्रीन बोर्ड पर लिखता है और सबसे लास्ट वाली बेंच वाली स्टूडेंट की तरफ इशारा करके बोला, "Solve it.”

सबसे लास्ट वाली बेंच पर एक लड़की बैठी थी, वह घबरा गई। वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई फिर वरदान को देखने लगी। वरदान अधीर होकर बोला, "कम हियर।"

वो लड़की घबरा जाती है। वह ग्रीन बोर्ड के पास आ जाती है, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। उसने एक नज़र वरदान को देखा।

वहीं आर्या मुँह बनाकर बोली, "खड़ूस कहीं का! सबको डरा रखा है।"

वरदान शैतानी नज़रों से आर्या को देखता है। उसने ग्रीन बोर्ड के पास खड़ी लड़की को देखते हुए बिना भाव से कहा, "get out”

वह लड़की घबराते हुए अपनी सीट की तरफ जाती है। तभी वरदान बोला, "Get out of the classroom." 

वह लड़की रोते हुए भाग जाती है, क्योंकि कई सारे स्टूडेंट उसके ऊपर हँस रहे थे।

आर्या अपनी मुट्ठी बंद कर लेती है। तभी वरदान उसकी तरफ देखते हुए ऑर्डर देता है, "Miss Arya, come here.”

आर्या हड़बड़ा कर उसकी तरफ देखने लगी। वरदान इस बार गुस्से से बोला, "कम हियर।"

आर्या खड़ी हो गई, लेकिन वो वरदान के पास नहीं गई। वरदान उसकी तरफ गुस्से से देखने लगा।

आर्या को भी गुस्सा आने लगता है। उसने दाँत पीसते हुए कहा, "मुझे नहीं आता क्योंकि कल मैं एब्सेंट थी।"

वरदान बिना भाव से बोला, "यह परसों के क्वेश्चन हैं।"

 फिर वह पूरी क्लास को देखता है, गुस्से से बोला, "अगर मेरी क्लास में पढ़ाई नहीं करते हैं तो बेहतर होगा कोई मेरी क्लास में ना आए। मुझे ऐसे स्टूडेंट की ज़रूरत नहीं है।"

आर्या गुस्से से बोली, "और हमें भी आपके जैसे प्रोफेसर की ज़रूरत नहीं है जो हर वक्त गुस्सा करता हो। आप यहाँ पर हमें पढ़ाने आए हैं, गुस्सा करने नहीं आए। आपको लगता है आप बहुत अच्छा पढ़ा रहे हैं, मगर आपको पता है आपके गुस्से के कारण हर कोई यहाँ पर डरा हुआ है, जिस कारण किसी का भी ध्यान पढ़ाई पर नहीं जाता है। अगर आप पढ़ा नहीं सकते हैं तो आप इस कॉलेज से चले क्यों नहीं जाते?"

लगभग 5 मिनट तक पूरे क्लासरूम में सन्नाटा पसरा हुआ था। वरदान और आर्या एक-दूसरे को गुस्से से देख रहे थे। 

वरदान के माथे की नसें साफ़ नज़र आ रही थीं। उसने नोटबुक उठाकर टेबल पर पटकते हुए कहा, "मिस आर्या, गेट आउट। आज के बाद आप मेरी क्लास में नहीं आ सकतीं।" 

आर्या भी गुस्से से बोली, "मैंने फ़ीस सबमिट की है, मैं क्यों नहीं आ सकती? कुछ तो लगता है, आप जैसे प्रोफेसर को हायर करके कॉलेज वालों ने गलती की है।"

वरदान एक ज़ोरदार किक टेबल पर मारता है। टेबल टूट कर ज़मीन पर गिर जाती है। हर कोई यह देखकर हैरान था।

 उसी वक्त वरदान तुरंत क्लासरूम से बाहर चला गया। सिया घबराई हुई आवाज़ में बोली, "यह तुमने क्या किया? क्या होगा अगर प्रोफेसर ने प्रिंसिपल से शिकायत कर दी? आर्या तुम प्रॉब्लम में आ जाओगी। क्या होगा अगर कॉलेज ने तुम्हें निकाल दिया तो?"

आर्या इस कारण भी गुस्से में थी क्योंकि कल उसका पहला किस अनजाने में ही चला गया था और वह किस वरदान जैसे खड़ूस इंसान को दिया गया था।

आर्या अपनी कमर पर हाथ रखकर बोली, "उस प्रोफेसर को क्या लगता है, मैं उससे डरती हूँ? बिल्कुल भी नहीं। अगर वह मेरी शिकायत प्रिंसिपल से करना चाहते हैं तो ठीक है, वह आराम से कर सकते हैं। मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। मैं भी उनकी शिकायत कर सकती हूँ।" इतना कहते ही वह अपना बैग उठाती है और जाने लगती है। 

सिया उसे रोकते हुए बोली, "तुम कहाँ जा रही हो?" आर्या बोली, "मैं प्रिंसिपल ऑफ़िस जा रही हूँ।"

सिया आर्या को रोक नहीं पाई। आर्या गुस्से में प्रिंसिपल ऑफ़िस की तरफ चली जाती है। 

गेट के पास पहुँचकर उसने गेट को नॉक किया। तभी अंदर से एक भारी आवाज़ आई, "कम हियर।" 

आर्या ऑफ़िस के अंदर चली जाती है, तो उसने देखा वरदान पहले से ही वहाँ मौजूद था। वरदान को देखते ही उसकी आँखें छोटी पड़ गईं।

 प्रिंसिपल ने सर उठाकर जब आर्या को देखा तो वह एक गहरी साँस लेते हैं, फिर आर्या को देखते हुए बोले, "मिस आर्या, मैं आपको बुलाने ही वाला था।"

आर्या को पता चल गया वरदान ने उसकी शिकायत कर दी है। वह अपने मन में बोली, "चुगलखोर!"

वरदान के बगल में खड़े होकर आर्या भी बोली, "सर, मुझे भी किसी की शिकायत करनी है।"

 प्रिंसिपल सर ने बारी-बारी से आर्या और वरदान को देखा, फिर गहरी साँस लेते हुए बोले, "आर्या, मिस्टर वरदान आपके प्रोफेसर हैं। आप उनकी इस तरह इंसल्ट नहीं कर सकतीं पूरे क्लास के सामने। यही नहीं, प्रोफेसर ने शिकायत की है कि आपके कारण पूरा क्लास डिस्टर्ब हो रहा है।" 

यह सुनते ही आर्या का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है।

आर्या अपने गुस्से को कंट्रोल करते हुए बोली, "सर, मेरे कारण कोई क्लास डिस्टर्ब नहीं हो रही है। यह सारी गलती प्रोफेसर की है। पूरा क्लास उनके गुस्से से कितना डरता है कि कोई भी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाता। यह हमें पढ़ाने के 5 मिनट बाद ही टेस्ट लेना स्टार्ट कर देते हैं। आप ही बताइए हम क्या करें? और जिसके भी नंबर कम होते हैं, यह उन्हें क्लास से बाहर कर देते हैं।"

प्रिंसिपल सर को भी लगा कि वरदान कुछ ज़्यादा ही कर रहा है। 

उन्होंने वरदान की तरफ देखा। तभी वरदान बिना भाव से बोला, "अगर मिस आर्या मेरे क्लास में आईं तो मैं उस क्लास को नहीं पढ़ाऊँगा। दिस इज़ माय फ़ाइनल डिसीज़न।"

वरदान को देखकर साफ़ पता च

ल रहा था वह अपना फ़ैसला नहीं बदलेगा। आर्या वरदान को घूरते हुए बोली, "आपको क्या लगता है, आप नहीं पढ़ाएँगे तो क्या पूरी दुनिया के प्रोफेसर मर चुके? और कोई हमें पढ़ाने नहीं आएगा? आप खुद को कुछ ज़्यादा ही नहीं आसमान पर चढ़ा रहे?"

 वरदान गुस्से से उसे उँगली दिखाकर बोला, "You..." तभी वहाँ कुछ टूटने की आवाज़ सुनाई दी। सभी चौंकते हुए दरवाज़े की तरफ देखते हैं।

कंटिन्यू,,,

आगे जानने के लिए बने रहे।

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