03

Emotionless

रूही आवाज़ की दिशा में काफी तेज़ रफ्तार से भाग रही थी। ठंडी हवा चल रही थी और मौसम भी खराब था, जिससे उसके बाल हवा में उड़ रहे थे।

इस वक्त रूही की आंखों में अजीब से भाव और थोड़ी उलझन थी।

देव उसके पीछे भागते हुए हल्के गुस्से में चिल्लाया, "रूही रुको! तुम कहां जा रही हो?" लेकिन रूही नहीं रुकी।

थोड़ी देर में रूही एक गली में पहुंची और वहां से निकलते ही उसे एक छोटी बच्ची नज़र आई।

उस बच्ची ने मेहरून रंग का फ्रॉक पहना था, दो चोटियां बनाई हुई थीं और वह बहुत खूबसूरत लेकिन डरी हुई थी।

उसने हाथों में ब्रेसलेट और सिर पर jewelry पहने हुए थे। उसकी शक्ल काफी हद तक रूही से मिलती थी और उसकी उम्र लगभग 4 से 5 साल लग रही थी।

उस बच्ची के ठीक सामने एक विशाल शेर खड़ा था, जो उसे डरावनी नज़रों से देख रहा था। रूही ने अपना एक हाथ कमर पर रखा और उलझन भरी नज़रों से उस बच्ची को देखने लगी।

वह छोटी बच्ची डर के मारे शेर को देख रही थी, तभी उसकी नज़र शेर के पीछे खड़ी रूही पर पड़ी।

उसे देखते ही बच्ची की आंखों में चमक आ गई और वह खुश होकर बोली— "दीदी दीदी रूहानिका को बचाइए!"

जैसे ही रूहानिका थोड़ा हिली, शेर गुर्राया और गर्दन मोड़कर खतरनाक अंदाज़ में उसे देखने लगा।

रूहानिका डर के मारे सिमट गई और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। रूही काफी देर तक उसे देखती रही। उसने अपना सिर सहलाया और आसमान की तरफ देखने लगी।

उसकी आंखों के सामने कुछ धुंधली तस्वीरें उभर रही थीं। उसे एहसास हुआ कि वह रूहानिका को नहीं जानती, फिर भी उस बच्ची का चेहरा बिल्कुल उसके जैसा था।

जब रूहानिका ने देखा कि रूही आगे नहीं बढ़ रही, तो वह और ज़ोर से रोते हुए बोली— "दीदी मैं आपको ढूंढने आई हूं, पिताजी को अभी नहीं पता कि मैं आपको ढूंढने आई हूं। मैं चुपके से भाग आई लेकिन रास्ते में यह दुष्ट शेर मुझे मिल गया, यह मुझे खाना चाहता है।"

अब रूही गुस्से में उस शेर को देख रही थी। जैसे ही शेर रूहानिका की तरफ बढ़ा, रूही बिना किसी डर या भाव के धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।

तभी देव भी वहां पहुंच गया। यह नज़ारा देख उसकी आंखें फटी रह गईं और वह चिल्लाया, "रूही रुक जाओ! क्या कर रही हो? सामने शेर है!"

मगर रूही ने उसकी बात अनसुनी कर दी। इसी बीच दूसरी तरफ से गार्ड्स की एक टीम वहां आ पहुंची।

उनके लीडर ने घबराकर कहा, "जल्दी करो, शेर को पकड़ो! अगर छोटे मालिक को पता चला कि हमने उनका शेर खो दिया है, तो हमारी खैर नहीं!" गार्ड्स तुरंत रूहानिका की ओर दौड़ने लगे।

रूही शेर के काफी करीब पहुंच गई थी। अचानक उस शेर को न जाने क्या हुआ, वह धीरे-धीरे रूही की तरफ देखने लगा और उससे दूर हटने लगा; मानो उसे रूही से डर लग रहा हो।

यह देखकर गार्ड्स हैरान रह गए। उनके लीडर ने कहा, "यह मिस्टर खुराना का सबसे खूंखार और निर्दयी जानवर है, यह कभी किसी को जिंदा नहीं छोड़ता। क्या यह सच में किसी से डर रहा है या मेरी आंखें धोखा खा रही हैं?"

'मिस्टर खुराना' शब्द सुनते ही रूही के कदम ठिठक गए।

उसकी आंखों में एक अजीब सा भाव उभरा और फिर उसके होठों पर मुस्कुराहट आ गई।

वह खुद से बोली, "बहुत अच्छा! मालिक न सही, उसके पालतू जानवर को ही सबक मिलना चाहिए।" इतना कहते ही रूही ने गुस्से से उस शेर की ओर देखा, जो डर के मारे पीछे हट रहा था।

शेर को डरते हुए देखकर रूही को एक सुकून महसूस हो रहा था। उसने एक कदम आगे बढ़ाया और उस शेर के सिर पर ज़ोर से एक मुक्का जड़ दिया।

उसे ऐसा महसूस हुआ मानो वह मिस्टर खुराना यानी विक्रांत को मार रही हो। उसे यह करके अच्छा तो लगा, लेकिन फिर भी उसने अपने अंदर पहले की तरह कोई प्यार भरी फीलिंग्स को महसूस नहीं की।

मुक्का लगते ही वह शेर वहीं गिर पड़ा और उसकी आंखें बंद हो गईं। वहां मौजूद हर शख्स मुंह फाड़े कभी शेर को देखता तो कभी रूही को।

किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि रूही के मार के कारण ऐसा हुआ है। लीडर चिल्लाया, "जल्दी करो, इसे उठाओ! शायद इसके ऊपर पहले दी गई दवाई का असर अब हुआ है।"

यह सुनकर रूही हंसने लगी।

लीडर रूही को नहीं पहचानता था, उसने कहा, "सॉरी मैडम, हमारी वजह से आपको थोड़ी परेशानी हुई।"

रूही ने अपनी भौहें ऊपर चढ़ाईं और एक हाथ से अपना गाल सहलाते हुए शरारती अंदाज़ में कहा, "चिंता मत करो, बहुत जल्द मेरी वजह से भी किसी को परेशानी होने वाली है... और बहुत जल्द ही!"

लीडर को उसकी बात समझ नहीं आई। रूही ने उसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया और अब वह रूहानिका को देखने लगी।

रूहानिका के चेहरे को देखते ही रूही को फिर से कुछ अजीब सा महसूस हुआ। वह गोल-गोल घूमते हुए बच्ची को अच्छे से 'स्कैन' करने लगी।

रूहानिका अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उसे देख रही थी, जिनमें अब भी आंसू थे।

वह तुरंत रूही के पैर पकड़कर खुशी से चहकी— "दीदी आखिरकार मैंने आपको ढूंढ लिया!"

रूही किसी पत्थर की मूरत की तरह निर्जीव खड़ी रही। तभी देव वहां पहुंचा और हांफते हुए बोला, "रूही, तुम कहां भाग कर आ गई थी? चलो जल्दी घर चलो! और यह बच्ची कौन है? क्या तुम इसे जानती हो?"

जब देव की नज़र रूहानिका पर पड़ी, तो वह दंग रह गया।

उसने गौर किया कि रूही और रूहानिका की आंखें बिल्कुल एक जैसी थीं और दोनों के ही गाल पर ठीक एक ही जगह तिल था। एक पल के लिए देव के मन में विचार आया कि कहीं यह 'देशमुख परिवार' की नाजायज बेटी तो नहीं है?

रूहानिका ने देव को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। उसने रूही को कसकर पकड़ा, अपना मुंह फुलाया और बोली— "मैं अब आपको नहीं छोडूंगी, मुझे आपके साथ रहना है। मैंने बहुत मुश्किल से आपको ढूंढा है!"

रूही कुछ देर तक उसे खामोशी से देखती रही, फिर उसका हाथ थामकर बस इतना बोली, "चलो।"

देव हैरानी से चिल्लाया, "रूही, क्या तुम किसी बच्चे को किडनैप कर रही हो? अभी-अभी तुम्हें मेंटल हॉस्पिटल से डिस्चार्ज मिला है और तुम फिर से पागलों जैसी हरकतें कर रही हो!"

'पागल' शब्द सुनते ही रूही मुस्कुरा दी, मगर उसकी आंखों के ठंडे भाव देखकर देव सिहर उठा।

उसे न जाने क्यों अंदर ही अंदर बुरा महसूस हुआ। उसे रूही की आंखों में पहले जैसी चमक नज़र नहीं आ रही थी; उसे लगा जैसे रूही के अंदर कुछ हमेशा के लिए खो गया है।

रूहानिका बड़े घमंड से बोली— "मनुष्य जी, मैं रूहानिका हूं! मेरा यहां रूही दीदी के अलावा कोई नहीं है, इसलिए मैं रूही दीदी के साथ जा सकती हूं। अगर आपने मुझे उनके साथ नहीं जाने दिया, तो मैं रूही दीदी को अपने साथ ले जाऊंगी।"

रूहानिका का अंदाज़ ऐसा था जैसे वह ऑर्डर दे रही हो, पूछ नहीं रही।

देव ने हैरानी से अपनी भौहें सिकोड़ लीं। वह ऐसे ही किसी अनजान बच्ची को अपने साथ नहीं ले जा सकता था।

उसने रूही की तरफ देखा, जिसने रूहानिका का हाथ पकड़ रखा था। रूही ने देव पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और वे दोनों साथ-साथ आगे बढ़ने लगीं।

देव को रूही का यह बदला हुआ बर्ताव समझ नहीं आ रहा था।

रूही इस बार कार में जाकर बैठ गई और रूहानिका भी उसके साथ थी। रूहानिका काफी 'एटीट्यूड' दिखा रही थी; उसने अपने दोनों हाथ सीने पर बांध रखे थे और ऊपर से नीचे तक देव को 'स्कैन' कर रही थी।

देव को यह थोड़ा अजीब लगा, पर वह कुछ नहीं बोला।

वहीं कुछ ही दूरी पर एक कार खड़ी थी जिसके बाहर विक्रांत खड़ा था। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। विक्रांत के बगल में उसकी ही उम्र के दो लड़के और मौजूद थे।

एक ने मुस्कुराते हुए देव की जाती हुई कार को देखा और कहा, "अरे मिस्टर खुराना, क्या वह तुम्हारी वही 'मजेदार' मंगेतर नहीं है, जिसे एक साल पहले मर्डर के जुर्म में जेल भेजा गया था? वह यहां क्या कर रही है?"

दूसरे लड़के ने शरारती मुस्कुराहट के साथ जोड़ा, "तुम्हारे पिता ने तो पहले ही कह दिया था कि भले ही रूही जेल गई हो, मगर तुम्हें शादी उसी से करनी पड़ेगी। मुझे पूरा यकीन है कि जब उन्हें पता चलेगा कि रूही बाहर आ गई है, तो वे सबसे पहले रिश्ता लेकर पहुंच जाएंगे।"

वे दोनों हंसने लगे, लेकिन विक्रांत के चेहरे के भाव और भी कठोर हो गए। वह जानलेवा नज़रों से देव की जाती हुई कार को घूर रहा था।

रूहानिका को कुछ महसूस हुआ। उसने शीशे से विक्रांत का चेहरा देखा और अजीब सा मुंह बनाकर बुदबुदाई— "तुच्छ इंसान, लगता है इसने कभी सुंदर लड़कियां नहीं देखी!"

रूही ने भी उसकी नज़र का पीछा किया और रियर-व्यू मिरर में देखा। विक्रांत की परछाई देखते ही उसके होठों पर एक ठंडी मुस्कुराहट आ गई, मगर उसके दिल में

अब भी कोई भावना या हलचल महसूस नहीं हुई। जो वो कभी महसूस करती थी।

कंटिन्यू…..

आगे जानने के लिए बने रहे।

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