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" Raghav singh thakur ko jo chahiye vo use pa hi leta hai"

राघव ठंडी नजरों से उस औरत को देखता है, मगर उसके होठों पर मुस्कुराहट थी।

उसने बहुत ही शांत आवाज में कहा, "बुआ जी, अगर हिम्मत है, तो बस एक बार और मेरी दुल्हनिया को मनहूस कहकर दिखाइए।"

भले ही उसके कहने का लहजा शांत था, मगर उसकी आँखों में तूफान हर कोई देख पा रहा था। राघव की बुआ डर जाती है।

राघव की बुआ राघव की माँ को देखते हुए बोली, "देखो, तुमने अपने बेटे को क्या सिखाया है? वह किस तरह से मुझसे बात कर रहा है। उसके अंदर बिल्कुल भी तमीज नहीं है। तुमने उसे बिगाड़ दिया है। वह एक बिगड़ैल गुंडे जैसा लग रहा है। अब तो शादी भी कर ली। पता नहीं किसी गरीब लड़की को उठा लाया है। पता नहीं इसका खानदान कैसा होगा।"

जैसे ही उन्होंने यह कहा, वहाँ पर सन्नाटा छा जाता है। राघव की आँखों में अजीब-सी धमकी थी, मगर होठों पर मुस्कुराहट। उसने एक नजर दुल्हन को देखा जो गहरी नींद में थी।

राघव अंदर जाने की कोशिश करता है, मगर राघव की माँ उसे देखते हुए कड़क आवाज में बोली, "रुक जाओ।" राघव के कदम रुक जाते हैं।

राघव की माँ राघव के सामने आ जाती है और गुस्से से बोली, "सच-सच बताओ, क्या तुमने सच में शादी कर ली है? क्या यह लड़की तुम्हारी बीवी है? और तुम... तुम आज ही 21 साल के हुए हो, इसलिए यह शादी शादी नहीं है।"

राघव की आँखों में एक खतरनाक चमक आ गई, मगर वह पहले की तरह ही शांत था। उसने अपनी माँ को देखते हुए कहा, "मैया, अभी आपने कहा कि मैं 21 साल का हो गया हूँ, इसलिए मैं शादी कर सकता हूँ।"

राघव की माँ का दिल जोर से धड़क रहा था। वह अपने बेटे को अच्छे से जानती थी। उसे जो चाहिए होता है, वह उसे जबरदस्ती छीन लेता है।

राघव की माँ की आँखों में गुस्से के साथ-साथ बेबसी भी झलक रही थी। तभी पीछे से एक लगभग 60 से 65 साल की बूढ़ी औरत आईं।

उस बूढ़ी औरत ने सफेद कलर की बनारसी साड़ी पहनी थी और गले में सफेद मोतियों का हार। बालों का जूड़ा बनाया था। आँखों पर अलग ही रौब था।

वह बिल्कुल एक महारानी जैसी लग रही थीं। उन्होंने राघव को देखा और तेज आवाज में बोली, "क्या तुमने जबरदस्ती शादी की है या फिर इस लड़की ने अपनी मर्जी से शादी की है?"

राघव कोई भी जवाब नहीं देता है, तो इस बार वह बूढ़ी औरत गुस्से से बोली, "राघव, जवाब दो मुझे, क्या तुमने जबरदस्ती की है?"

राघव अजीब तरीके से मुस्कुराते हुए बोला, "राघव सिंह ठाकुर को जो चाहिए होता है, वह राघव सिंह ठाकुर पा लेता है, प्यार से या जबरदस्ती से।"

राघव ने जैसे ही अपनी बात खत्म की, राघव की माँ एक जोरदार थप्पड़ राघव को मार देती है। राघव का चेहरा हल्का-सा तिरछा हो जाता है, मगर राघव के चेहरे पर अभी भी मुस्कुराहट बरकरार थी और यह मुस्कुराहट देखकर वहाँ मौजूद हर किसी को गुस्सा आ रहा था।

राघव की माँ राघव को एक और थप्पड़ मारने वाली थी, मगर वह बूढ़ी औरत गुस्से से बोली, "बहुरानी, हिम्मत भी मत करना हमारे पोते को थप्पड़ मारने की।"

राघव की माँ हैरानी से बोली, "माँ, आप यह क्या कह रही हैं? आपने देखा नहीं, यह बच्चा जबरदस्ती शादी करके आया है और आप अभी भी इसकी तरफ से बोल रही हैं।"

वह बूढ़ी औरत रौबदार आवाज में बोली, "वह मेरा पोता है। वह जो चाहे कर सकता है। अगर वह शादी करना चाहता है तो इसमें क्या दिक्कत है?"

राघव की माँ पूरी तरीके से हैरान थी। राघव की बुआ उस बूढ़ी औरत को देखकर बोली, "माँ, आप यह क्या बोल रही हैं? आपने इसे सिर पर चढ़ा रखा है, तभी देखिए इसने क्या कर दिया है। पता नहीं किस गंदगी से इस लड़की को उठाकर लाया है। क्या पता कोई गरीब घर की लड़की हो। हो सकता है उसने ही राघव को फँसा दिया हो। कम से कम मेरे बेटे तो ऐसे नहीं हैं, मगर आपको फिर भी राघव ही सही लगता है।"

वह बूढ़ी औरत हर किसी को अपनी पैनी नजरों से देखती हैं। उस बूढ़ी औरत की नजर इतनी कठोर थी कि राघव की बुआ का मुँह बंद हो गया।

वह बूढ़ी औरत एक-एक शब्द पर जोर देकर बोली, "अगर किसी को भी हमारे पोते से शिकायत है, तो तुरंत यहाँ से निकल जाए। अगर किसी ने भी मेरे पोते के बारे में एक शब्द भी कहा, तो मैं, यानी गायत्री सिंह राठौड़, यह बर्दाश्त नहीं करूँगी।"

राघव की माँ बोली, "लेकिन माँ..."

गायत्री जी अपना हाथ दिखाकर उन्हें चुप करते हुए बोली, "बस बहुत हो गया। हम कुछ बोल नहीं रहे इसका मतलब यह नहीं कि तुम सब जवान लड़ाने लगोगे और मैं मरी नहीं जो तुम सब मेरे पोते से इस तरह बात कर रहे हो।"

गायत्री जी की नजर दुल्हन पर जाती है। उन्होंने राघव को देखते हुए पूछा, "क्या यह बेहोश है?"

शूरवीर और निशांत शांत थे। बेचारे दोनों डरे हुए थे। शूरवीर आगे आते हुए डरकर बोला, "दादी, वह शायद बेहोश होगी। वह काफी देर से रो रही थी, भाभी जी।"

गायत्री जी लगातार दुल्हन को देख रही थीं। किसी को पता नहीं चल रहा था उनके मन में क्या चल रहा है।

तभी बाहर कार रुकने की आवाज सुनाई देती है। एक लड़की दौड़ते हुए अंदर आ रही थी। उस लड़की के साथ एक औरत भी थी। उस लड़की ने बहुत ही स्टाइलिश कपड़े पहने हुए थे।

उस लड़की की उम्र लगभग 19 साल होगी। वह खुश होकर बोली, "राघव, तुम वापस आ गए। मुझे जैसे ही पता चला, मैं भागते हुए तुमसे मिलने आ गई।" इतना कहते ही वह राघव के बगल में आकर खड़ी हो गई, मगर राघव की गोद में एक दुल्हन को देखते ही उस लड़की के चेहरे के एक्सप्रेशन बदल गए।

उसे कुछ बुरा होने का एहसास हुआ। उस लड़की ने राघव को देखा और जबरदस्ती अपने होठों पर मुस्कुराहट सजाते हुए बोली, "राघव, यह लड़की कौन है और इसने शादी का जोड़ा क्यों पहना है?"

राघव को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे लड़की से एलर्जी हो। वह तुरंत दो कदम पीछे होकर खड़ा हो गया, मगर एक शब्द भी नहीं बोला।

शूरवीर की आँखों में अजीब-सी चमक आ गई। उसे देखकर साफ पता चल रहा था वह भी उस लड़की को पसंद नहीं करता। शूरवीर राघव को देखते हुए बोला, "भैया, भाभी जी बेहोश हैं? क्या हमें उन्हें होश में लाना चाहिए?"

वह लड़की 'भाभी जी' शब्द सुनते ही दाँत पीस लेती है और घबराते हुए बोली, "तुम किस भाभी की बात कर रहे हो? क्या बड़े भाई ने शादी कर ली है? बड़े भाई कहाँ हैं? वह बिना बताए कैसे शादी कर सकते हैं? और उन्होंने तो कहा था वह शादी करेंगे ही नहीं। आखिरकार 32 साल की उम्र में उन्होंने शादी कर ली।"

इतना कहते ही वह लड़की अजीब तरीके से मुस्कुराती है और आसपास देखते हुए बोली, "कहाँ हैं बड़े भाई? और राघव, तुमने उनकी बीवी को क्यों पकड़ा है?"

शूरवीर उस लड़की की बात सुनकर बोला, "ऐसा लगता है तुम्हें गलतफहमी हो गई है और हाँ, वह तुम्हारे भाई नहीं हैं, वह हमारे रघु भैया के भाई हैं।"

गायत्री जी को भी देखकर लग रहा था कि उन्हें भी वह लड़की पसंद नहीं है। उन्होंने तुरंत राघव की माँ को देखते हुए ऑर्डर दिया, "जाओ, जाकर थाल लेकर आओ और चावल का कलश।"

राघव की बुआ तुरंत बोली, "लेकिन माँ..."

गायत्री जी हाथ दिखाकर बोली, "इस घर में आखिरी फैसला सिर्फ हमारा है। अगर हमारे पोते को यह लड़की पसंद है, तो आज से यही इस घर की छोटी बहू होगी।"

हर कोई परेशान था। राघव की माँ गुस्से से राघव को देख रही थी, मगर राघव के होठों पर हमेशा की तरह मुस्कुराहट थी। वह बिल्कुल शांत होकर गायत्री जी को देख रहा था। उसका यही शांत स्वभाव और मुस्कुराहट हर किसी को गुस्सा दिला रहा था।

राघव ने देखा उसकी माँ नहीं गईं, तो उसने चुलबुले अंदाज में कहा, "मैया, मैं मानता हूँ कि मैं जिम जाता हूँ, मगर इसका मतलब यह नहीं कि मैं अपनी दुल्हनिया को इतनी देर तक गोद में लेकर खड़ा रहूँ। लेकिन अगर आप गृह प्रवेश नहीं करना चाहतीं तो कोई बात नहीं, मैं मेरे रूम में जा रहा हूँ।"

इतना कहते ही राघव अंदर जाने लगता है, मगर वह लड़की शॉक थी। वह तुरंत राघव के कंधे को पकड़कर उसे रोकते हुए घबराकर बोली, "क्या कहा तुमने? गृह प्रवेश? और कौन सी दुल्हनिया? क्या यह बड़े भाई की दुल्हन नहीं है?"

राघव ने ठंडे अंदाज में अपने कंधे को देखा जहाँ पर उस लड़की ने हाथ रखा था। राघव की आँखें जलने लगी थीं। निशांत तुरंत उस लड़की के हाथ को राघव के कंधे से हटा देता है।

राघव बिना किसी की तरफ देखे तुरंत अपने कमरे की तरफ चला जाता है। गायत्री जी पीछे से आवाज लगाती हैं, "राघव, गृह प्रवेश नहीं हुआ है। और राघव..."

लेकिन राघव नहीं रुकता है। गायत्री जी गुस्से से राघव की माँ को देखकर बोली, "मिल गया तुम्हें सुकून मेरे पोते को गुस्सा दिलाकर केतकी?"

राघव की माँ, यानी केतकी, चुप हो जाती हैं, क्योंकि गायत्री जी से हर कोई डरता था। उसके बाद गायत्री जी उस लड़की की तरफ देखती हैं जो राघव से सवाल कर रही थी।

गायत्री जी ऊपर से नीचे तक उस लड़की को देखकर दबंग भरी आवाज में बोली, "ए लड़की, तुमने क्या हमारे घर को धर्मशाला समझ रखा है कि जब चाहोगी मुँह उठाकर आ जाओगी? ऐसा लग रहा है अपने आधे कपड़े घर पर छोड़ आई हो। न शर्म है, न लिहाज। और आइंदा से अपने गंदे हाथ से मेरे पोते को मत छूना।"

गायत्री जी वहाँ मौजूद सभी को देखती हैं, जिसमें से कुछ केतकी जी के दोस्त भी मौजूद थे। उसके बाद गायत्री जी केतकी जी से बोली, "अपने पति और बेटे को इस बारे में बता दो और अब कोई भी मेरे पोते को परेशान नहीं करेगा।" इतना कहते ही गायत्री जी अपने कमरे की तरफ चली जाती हैं।

वहाँ मौजूद हर कोई पत्थर की तरह अपनी जगह पर खड़ा था। कोई भी इस बात को हजम नहीं कर पा रहा था कि राघव शादी करके आया है।

राघव चौथी मंजिल पर जाता है। वहाँ का पूरा एरिया उसका अपना पर्सनल एरिया था।

राघव के चेहरे पर इस वक्त कोई भी भाव नहीं था। वह बिल्कुल एक अलग ही इंसान लग रहा था। उसने लात मारकर अपने रूम का दरवाजा खोल दिया। पूरा रूम बहुत ही खूबसूरत था। व्हाइट और ग्रे का कॉम्बिनेशन था। बीच में किंग साइज बेड था जिस पर ग्रे कलर की बेडशीट भी बिछी हुई थी।

राघव दुल्हन को बेड पर लिटा देता है। राघव के चेहरे पर कोई भाव नहीं था, मगर उसकी आँखों में एक दिलचस्पी नजर आ रही थी।

राघव ने धीरे से घूँघट को उठा दिया और रूम में ज्यादा रोशनी नहीं थी, इसलिए राघव ठीक से चेहरा नहीं देख पा रहा था। राघव आँखें छोटी करके उस दुल्हन के चेहरे को देख रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था वह गहरी नींद में है या बेहोश है।

राघव ने उस दुल्हन के चेहरे को टच किया और राघव को उसे छूना पसंद आया। राघव की आँखों में अधिकार की भावना नजर आने लगी।

वह उस लड़की को अपना समझने लगा। उसकी आँखों में धीरे-धीरे अधिकार की भावना बढ़ने लगी जो ओवर पजेसिवनेस में बदलने लगी।

राघव खतर

नाक मुस्कुराहट के साथ बोला, "हे दुल्हनिया, अब तुम हमारी दुनिया में शामिल हो गई, जहाँ मेरे सिवा कोई तुम्हें छू नहीं सकता।”

कंटिन्यू….

आगे जानने के लिए बने रहे।

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