राघव के चेहरे पर शांत एक्सप्रेशन थे। उसने अपनी नाक को उस लड़की की गर्दन पर रगड़ा तो वह लड़की सिहर उठी।
राघव अपने सर को हल्का सा ऊपर करके उस लड़की की आँखों में देखता है।
राघव की आँखें और भी ज़्यादा गहरी होती जा रही थीं।
उसके बाल उसके माथे पर बिखरे थे जो उसे बचकाना लुक दे रहे थे, मगर उसकी आँखें हमेशा की तरह रहस्यमयी थीं।
राघव अपने अंगूठे को उस लड़की के होठों पर रखता है और अपने सर को नीचे करते हुए उसके कान में धीमी, मगर दबंग आवाज़ में बोला, "ए दुल्हनिया, इतना हैंडसम और सुंदर पति पाकर कैसा लग रहा है? मन ही मन तुम बहुत खुश होगी, है ना?"
राघव की बात सुनकर उस लड़की के चेहरे के एक्सप्रेशन थोड़े से बदल जाते हैं।
राघव की आँखों में एक अलग ही गहराई थी। राघव की आँखें न केवल राघव को रहस्यमय बनाती थीं, बल्कि उसे खतरनाक भी बनाती थीं।
वह लड़की कसकर अपने टॉवल को पकड़ लेती है, मगर उसका दिल अभी भी घबराया हुआ था।
उसने कसकर अपनी मुट्ठी बंद कर ली और काँपते हुए होठों से बोली, "ह…हटिए न जी।"
उस लड़की की आवाज़ बहुत धीमी थी, मगर बहुत प्यारी थी।
राघव की आँखें चमकने लगीं। वह दबंगई से बोला, "नहीं जी।"
राघव ने देखा वह लड़की अभी भी घबराई हुई थी तो उसकी आँखों में फिर से अधिकार की भावना जागने लगी।
उसने अपनी नज़रें उस लड़की की गर्दन पर टिकाई जो खुली हुई थी और किसी को भी लालच करने पर मजबूर कर सकती थी।
राघव उसकी गर्दन पर हाथ फेरते हुए पूरे जुनून से बोला, "हे दुल्हनिया, ख़ुद को किसी को देखने मत दो, वरना हमें नहीं पता हम क्या करेंगे।"
राघव तुरंत खड़ा हो जाता है और उस लड़की को भी खड़ा कर देता है। दोनों 5 मिनट तक वहीं खड़े थे।
अचानक राघव अजीब तरीके से मुस्कुराकर बोला, "क्या तुम यह टॉवल भी हटाना चाहती हो? मैं इंतज़ार कर रहा हूँ, जल्दी करो।"
उस लड़की का चेहरा शर्म और गुस्से से लाल पड़ गया और वह राघव को गुस्से से देखने लगी।
राघव अपने बालों में हाथ फेरकर सेल्फ-ऑब्सेस्ड होकर बोला, "हमको पता है हम बहुत सुंदर हैं और तुम सुंदर पति पाकर खुश हो, लेकिन तुम हमें ऐसे देखोगी तो हमें शर्म आएगी और हमारी मैया कहती हैं हमें बहुत जल्दी नज़र लगती है तो हमें ऐसे मत देखो।"
वह लड़की स्पीचलेस रह गई।
तभी रूम के बाहर से केतकी जी की आवाज़ आई, "राघव!"
राघव उस लड़की को रहस्यमय नज़रों से देखते हुए रूम के बाहर चला जाता है।
केतकी जी राघव से बोलीं, "माँ ने नए कपड़े भेजे हैं और रस्म के लिए नीचे बुलाया है। अपनी पत्नी को लेकर नीचे आओ।" इतना कहते ही वह कपड़े राघव को पकड़ा देती हैं और तुरंत वहाँ से चली जाती हैं।
रूम के अंदर वह लड़की अभी भी बेचैन थी। डर और घबराहट दोनों उसके अंदर थीं। वह यहाँ से भागना चाहती थी। वह अपना सर नीचे करके सोचने लगी कि वह यहाँ से कैसे निकल सकती है।
राघव अचानक पीछे से आकर अपने सर को उस लड़की के कंधे पर रखते हुए तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला, "हे दुल्हनिया, भागने के बारे में सोच रही हो?"
राघव की मुस्कुराहट अगले ही पल एक सनकपन में बदल गई और वह बहुत ही क्रुएलिटी के साथ बोला, "भागकर तो दिखाओ। अगर तुम्हारे परिवार को गायब न कर दिया तो हमरा नाम भी राघव सिंह ठाकुर नहीं।"
अचानक ही राघव के बदले बर्ताव ने उस लड़की को शॉक में डाल दिया।
उसके रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि राघव एक अलग ही इंसान लग रहा था जो किसी को भी डरने पर मजबूर कर सकता था। राघव कपड़े वहीं रखकर सीटी बजाते हुए वॉशरूम में चला जाता है।
उस लड़की ने कसकर अपनी मुट्ठी को बंद कर लिया।
दूसरी तरफ, केतकी जी उदास थीं।
वह शत्रुघ्न जी के पास आईं जो तैयार होकर जाने वाले थे। शत्रुघ्न जी जब उन्हें देखते हैं तो उन्होंने सवाल किया, "श्रीमती जी, क्या हुआ?"
केतकी जी नाराज़ होकर बोलीं, "वह लड़की हमारे बेटे के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। क्या आपको पता भी है क्या हुआ? मैं बस माँ के कहने पर कपड़े लेकर राघव के कमरे में गई थी। मैंने उसकी बीवी पर केवल एक नज़र ही डाली थी और राघव ने मुझ पर चिल्लाया और मुझे रूम से निकाल दिया। कुछ ही वक्त में उस लड़की के कारण मेरे बेटे ने मुझ पर गुस्सा किया।"
शत्रुघ्न जी एकदम से अपनी जगह पर जम गए। एक पल के लिए उनके चेहरे पर घबराहट आई, मगर अगले ही पल वह सीरियस होकर बोले, "तुम्हें पता है ना वह बचपन से ही अपनी चीज़ों के लिए बहुत जुनूनी रहा है। यहाँ बात उसकी बीवी की है। चिंता मत करो, वह अभी भी तुम्हारा वही बिगड़ैल बेटा ही है।"
शत्रुघ्न जी केतकी जी की कोई बात नहीं सुनते और तुरंत चले जाते हैं। अभिमान भी ऑफ़िस के लिए रेडी होकर नीचे आया था।
शत्रुघ्न जी के चेहरे पर परेशानी देखकर उसके चेहरे के एक्सप्रेशन भी बदल गए। शत्रुघ्न जी अभिमान को देखते हुए बोले, "मेरे साथ चलो, एक गड़बड़ हो गई है। मुझे लगता है राघव के साथ फिर से कुछ गड़बड़ हो रही है।"
अभिमान अपनी आँखें छोटी करके पूछा, "आपके कहने का मतलब क्या है?"
शत्रुघ्न जी अपने माथे को सहलाकर बोले, "जिस बात का डर था वही हो रहा है। पहले किसी भी तरह से राघव को साइकैट्रिस्ट के पास लेकर जाओ। इस बारे में किसी को पता नहीं चलना चाहिए। मुझे जानना है क्या उसके बचपन के लक्षण फिर से सामने आ रहे हैं।"
अभिमान और भी ज़्यादा सीरियस हो जाता है। उसने कहा, "राघव ख़ुद को छिपाने में बहुत माहिर है। हमें अभी साइकैट्रिस्ट के पास नहीं जाना चाहिए। पहले हमें ख़ुद उसके बर्ताव पर गौर करना चाहिए। अगर कुछ ठीक नहीं रहा तो हमें उसकी पत्नी को उससे दूर करना पड़ेगा, वरना उस लड़की की जान को ख़तरा होगा।"
गायत्री जी ने देखा केतकी जी आ रही हैं। उन्होंने नाराज़ होकर पूछा, "क्या तुम अपनी बहू को लेकर आई हो? देखो, अभिमान और शत्रुघ्न जाने वाले हैं।"
केतकी जी ताना मारकर बोलीं, "आप ही ने कहा था ना आज से वह इस घर की बहू है तो देखिए इस बहू के लक्षण कैसे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारा घर जल्दी ही बर्बाद हो जाएगा।"
तभी राघव जो वहाँ पर आ गया था, अजीब तरीके से मुस्कुराकर बोला, "कौन बर्बाद हो रहा है मैया?"
राघव के आते ही सभी नॉर्मल हो जाते हैं। गायत्री जी राघव के पास जाकर दोनों हाथों से उसकी बलाएँ लेते हुए बोलीं, "मेरा प्यारा पोता दिन-ब-दिन और भी ज़्यादा सुंदर होता जा रहा है। कहीं किसी की नज़र न लग जाए।"
तभी गायत्री जी की नज़र राघव के पीछे खड़ी उसकी दुल्हन पर पड़ गई तो उनके चेहरे पर थोड़े से कठोर भाव आ गए।
गायत्री जी उसे देखते हुए बोलीं, "तुम अब हमारे खानदान की छोटी बहू हो और हमारे प्यारे पोते की पत्नी। उम्मीद है कि तुम अपना सभी फ़र्ज़ अच्छे से निभाओगी और हमारे पोते को निराश नहीं करोगी।"
वह लड़की अपने सर को झुका लेती है। राघव थोड़ा सा साइड होता है तो गायत्री जी उस लड़की को ध्यान से देखती हैं। उसने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। दोनों हाथों में चूड़ा, गले में मंगलसूत्र, और माँग में सिंदूर था।
उसके बाल खुले थे और गजरा लगा हुआ था। वह बहुत ही सुंदर लग रही थी। एक पल के लिए तो गायत्री जी भी उससे नज़र नहीं हटा पाईं।
उनके मुँह से निकला, "राघव, तुमने बहुत ही सुंदर पत्नी लाई है जैसा कि मेरे पोते से उम्मीद की जाती है। उसकी नज़रें बहुत अच्छी हैं।"
राघव अपने बालों में हाथ फेरते हुए बोला, "बिल्कुल।"
गायत्री जी उस लड़की से बोलीं, "तुम्हारा नाम क्या है? तुम्हारी उम्र कितनी है?"
वह लड़की हल्का सा घबरा जाती है। उसके होंठ काँप रहे थे।
तभी राघव ने बीच में कहा, "मैया, मुझे भूख लगी है।"
केतकी जी ताना मारकर बोलीं, "आज का खाना तो तुम्हारी पत्नी को बनाना था, मगर देखो तुम्हारी पत्नी कितनी देर से उठी और उसने कुछ भी नहीं बनाया।"
यह सुनते ही राघव की आँखें खतरनाक तरीके से छोटी हो गईं और वह तुरंत अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर बिना भाव से बोला, "वह खाना क्यों बनाएगी? वह हमारी पत्नी है।"
राघव के बदले बर्ताव को तुरंत अभिमान और शत्रुघ्न जी ने नोटिस किया, ख़ासकर उसकी आँखों के रहस्यमयी इरादों को।
दोनों ही परेशान हो गए, मगर जल्दी ही नॉर्मल हो गए।
गायत्री जी समझकर बोलीं, "यह बस एक रस्म है। उसे पूरे परिवार के लिए कुछ मीठा बनाना है।"
राघव के चेहरे के एक्सप्रेशन अभी भी नहीं बदले। उसके अंदर अधिकार की भावना फिर से जागने लगी।
राघव तुरंत बोला, "नहीं।"
केतकी जी हैरानी से बोलीं, "आखिरकार इस लड़की ने तुम्हें कौन-सी जड़ी-बूटी पिलाई है जो तुम इसके वश में आ गए हो? बेटा, यह केवल रस्म है।"
राघव की आँखें अब भयंकर तरीके से लाल हो गई थीं, मगर फिर अचानक वह पीछे पलटकर अपनी दुल्हनिया को देखता है और फिर बोला, "तुम हमारी हो। सिर्फ़ हमारे लिए खाना बनाओ।"
उसकी बात सुनकर सभी स्पीचलेस रह गए। केतकी जी और गायत्री जी को समझ नहीं आ रहा था वह राघव को कैसे समझाएँ।
तभी अभिमान अपनी जगह से खड़ा हो गया। उसने अपनी भारी आवाज़ में सभी से कहा, "ठीक है। शेफ़ से कहिए खाना बनाए। अगर राघव नहीं चाहता है तो इस रस्म की कोई ज़रूरत नहीं है। क्यों राघव बच्चा?"
राघव के चेहरे के एक्सप्रेशन एकदम से बदल गए और वह मुस्कुराकर बोला, "बिल्कुल भाई।"
केतकी जी तुरंत बोलीं, "पर कम से कम इस लड़की को संस्कार के बारे में तो पता होना चाहिए कि सुबह-सुबह उसे अपनी सास और दादी सास के पैर छूने चाहिए।"
राघव के एक्सप्रेशन जो अभी अच्छे थे, अचानक फिर से ख़राब हो गए।
अभिमान तुरंत सभी की तरफ देखते हुए अपने गर्दन से "ना" में हिला देता है।
अब किसी ने राघव की दुल्हन को फ़ोर्स नहीं किया। गायत्री जी थोड़ा सा नाराज़ थीं, मगर राघव के कारण उन्होंने इस बारे में बात नहीं की।
शेफ़ ने जल्दी ही ब्रेकफास्ट रेडी कर दिया था। सभी डाइनिंग टेबल पर बैठ गए थे।
राघव ने अभी तक अपनी प्यारी दुल्हन का हाथ नहीं छोड़ा था। सभी ने इस बात को नोटिस किया था। राघव ने अपने बगल में अपनी दुल्हन को बैठाया।
सभी की नज़रें उन दोनों के ऊपर थीं। राघव ने जो खाना अपनी प्लेट में डाला था, वही खाना उसने अपनी दुल्हन के प्लेट में भी डाला।
सरला जी वहाँ पर आईं। वह भी बैठते हुए बोलीं, "वैसे राघव, तुम्हारी पत्नी का नाम क्या है और उसकी उम्र क्या है?"
राघव अपनी प्यारी पत्नी को देखने लगा। वह भी यह बात जानना चाहता था। राघव के चेहरे पर ऐसे एक्सप्रेशन आए जिसे देखकर हर कोई स्पेशलेस रह गया।
सरला जी तुरंत बोलीं, "क्या तुम्हें अपनी पत्नी का नाम भी नहीं पता?"
राघव सीधे बैठकर बोला, "हमरा पूरा फ़ोकस शादी करने पर था, इसलिए हमने ध्यान ही नहीं दिया।"
सरला जी जो पानी पी रही थीं, पूरा पानी उनके गले में अटक गया और वह खाँसने लगीं।
केतकी जी ने मुँह बनाते हुए पूछा, "ए लड़की, तुम्हारा नाम क्या है और तुम्हारी उम्र कितनी है?"
वह लड़की अपने सर को नीचे करके बैठी थी। उसे सभी लोग बहुत ज़्यादा अजीब लग रहे थे।
वह अपने हाथ राघव के हाथ से छुड़ाना चाहती थी, मगर राघव नहीं छोड़ रहा था।
सरला जी ताना देकर बोलीं, "अब क्या तुम्हें सुनाई नहीं देता? बोलो तुम्हारा नाम क्या है और तुम्हारी उम्र कितनी है? तुम्हारा परिवार कहाँ है?"
वह लड़की अपनी मुट्ठी कसकर बंद कर लेती है और धीमी आवाज़ में हकलाते हुए बोली, "म…मेरा नाम देवी है और... उम्र 24 साल है।"
जैसे ही देवी ने यह कहा, वहाँ पर सन्नाटा पसर गया। अभिमान जूस पी रहा था।
अचानक देवी की उम्र सुनते ही जूस उसके मुँह से बाहर निकल गया और वह खाँसने लगा। उसने हैरानी से राघव को देखा जो देवी की उम्र सुनकर खुश था। जैसे उसे खुद पर गर्व हो रहा हो।
गायत्री जी के हाथ से चम्मच छूटकर नीचे गिर गया। शत्रुघ्न जी के गले में खाना
अटक गया और केतकी जी तो पत्थर की तरह जम गईं।
केतकी जी सबसे पहले होश में आईं और राघव को घूरते हुए बोलीं, "राघव, वह तुमसे 3 साल बड़ी है।"
राघव जो खुश होकर देवी को देख रहा था, वह केतकी जी की तरफ देखने लगा।
कंटिन्यू…..
आगे जानने के लिए बने रहे।




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