09

" Party"

राघव जब घर पहुँचा तो पार्टी लगभग शुरू होने वाली थी। राघव के हाथ में काफ़ी सामान था जिसे उसने किसी को भी छूने नहीं दिया था।

राघव इस वक़्त हवेली के दरवाज़े के पास खड़ा था। शूरवीर और निशांत उसके पीछे थे।

उन दोनों के चेहरे के भाव थोड़े से अजीब थे। राघव घर के अंदर कदम रखता है। सभी मेहमानों का स्वागत गायत्री जी और केतकी जी कर रही थीं।

गायत्री जी के चेहरे के भाव काफी सीरियस थे। उनकी आंखें ठंडी थी।

शत्रुघ्न जी और अभिमान अभी तक वापस नहीं आए थे। पार्टी में हाई प्रोफ़ाइल लोग आए थे, जिसमें कुछ फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग थे, कुछ बिजनेसमैन लोग थे और कुछ पॉलिटिशियन लोग थे।

राघव आसपास अपनी नज़रें घुमाता है। वह देवी को ढूँढ़ रहा था। राघव सीधे अपने रूम में जाना चाहता था, मगर रास्ते में ही एक लड़की उसे रोक लेती है।

राघव बिना भाव के उस लड़की को देख रहा था।

यह वही लड़की थी जिसने पहली बार देवी को देखते ही उसके बारे में बहुत कुछ कहा था और गायत्री जी ने उसे डाँटा भी था।

राघव के चेहरे के भाव बदलते देखकर शूरवीर उस लड़की को देखकर बोला, "आयुषी, रघु भैया को परेशान मत करो और सामने से हट जाओ।"

आयुषी ने प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ शूरवीर और निशांत को देखा तो उन दोनों के रोंगटे खड़े हो गए।

आयुषी मुस्कुराकर राघव से बोली, "राघव, तुम इतनी देर से क्यों आए हो? यह तुम्हारी ही बर्थडे पार्टी है और तुम इतना लेट आ रहे हो। दिस इज़ नॉट फेयर। तुमने तो कपड़े भी नहीं बदले हैं। चलो, मैं तुम्हें तुम्हारे रूम तक लेकर चलती हूँ।" इतना कहते ही आयुषी राघव को चमकती हुई आँखों से देखने लगी।

शूरवीर को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था। शूरवीर मुस्कुराते हुए आयुषी से बोला, "तुम्हें इसकी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। रघु भैया का ध्यान रखने के लिए अब भाभी हैं। क्या तुम भूल गई रघु भैया ने पहले ही शादी कर ली है?"

यह सुनते ही आयुषी के चेहरे के भाव बदल जाते हैं और वह कसकर अपनी मुट्ठी भींच लेती है।

आयुषी झूठी मुस्कुराहट के साथ राघव को देखकर बोली, "राघव, मैंने सुना है तुम्हारी बीवी एक छोटे से गाँव से आई है। उसे हम जैसे हाई प्रोफ़ाइल लोगों के बारे में कहाँ पता होगा? मैंने तो उसे अभी तक देखा भी नहीं है। शायद वह यहाँ आने से डर रही होगी। क्यों न मैं तुम्हारे साथ चलूँ? फिर मैं तुम्हारी बीवी से दोस्ती करूँगी और उसे हमारे तौर-तरीक़े सिखाऊँगी ताकि तुम कभी उसे किसी पार्टी में लेकर जाओ तो तुम्हें शर्मिंदगी महसूस न हो।"

लोगों के लिए आयुषी के शब्द काफ़ी अच्छे हो सकते थे कि आयुषी को देवी की चिंता हो रही थी, इसलिए वह ऐसा कह रही है, मगर आयुषी के सामने खड़े तीनों लड़के अच्छे से समझ रहे थे कि आयुषी देवी का मज़ाक उड़ा रही है।

राघव के चेहरे के भाव बदल गए थे। राघव की आँखें सनकपन से भर गई थीं।

आयुषी डरकर दो कदम पीछे हो जाती है, फिर मुस्कुराकर बोली, "राघव, मैं तो अच्छे इरादे से ही सब कुछ कह रही हूँ ताकि देवी को बाद में कोई प्रॉब्लम न हो।"

राघव की आँखें काफ़ी डार्क थीं, मगर उसके होठों पर अजीब सी मुस्कुराहट थी।

राघव शांति से मुस्कुराते हुए बोला, "हमारी दुल्हनिया को हमारे अलावा और किसी की ज़रूरत नहीं है। तुम जैसी ड्रामेबाज़ की तो बिल्कुल भी नहीं, जो हमारी दुल्हनिया को बिगाड़ दे और उसे अपनी तरह बेवकूफ़ बना दे। हमारी दुल्हनिया से दूर रहो।"

आयुषी को इग्नोर करते हुए वह चला गया। आयुषी गुस्से से अपनी जगह पर खड़ी थी।

निशांत आयुषी को देखकर बोला, "बेहतर होगा रघु भैया से दूर रहो। तुम्हें अभी तक केवल उनका शांत स्वभाव देखा है, उनके पागलपन को नहीं देखा है। अगर रघु भैया को गुस्सा आया तो तुम्हारा परिवार भी तुम्हें बचा नहीं पाएगा।" इतना कहते ही निशांत शूरवीर के साथ चला गया।

गायत्री जी और केतकी जी मेहमानों के साथ थीं। उन्होंने राघव को नहीं देखा था।

सरला जी इस वक़्त अपने रूम में तैयार हो रही थीं। उनके रूम में कई सारी लड़कियाँ मौजूद थीं, जिनमें से कुछ उनके कपड़े चुन रही थीं और कुछ उनका मेकअप कर रही थीं।

सरला जी खुद को शीशे में देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं, "मुझे जल्दी से तैयार करो ताकि मैं जाकर अपने घर की पहली बहू को देख सकूँ कि वह तैयार हुई है या नहीं।"

यह सुनकर जो लड़की मेकअप कर रही थी, वह हैरान होकर बोली, "क्या कहा? बहू? लेकिन आंटी, ठाकुर परिवार में तो किसी की शादी नहीं हुई।"

सरला जी मुस्कुराकर बोलीं, "किसने कहा शादी नहीं हुई? तुम्हें थोड़ी देर में पता चल जाएगा।" इतना कहते ही सरला जी के होठों पर रहस्यमय मुस्कुराहट आ गई और वह लड़की काफ़ी उत्सुक हो गई। उसके बाद वह सरला जी का मेकअप करने लगी।

राघव अपने रूम में पहुँचा, लेकिन राघव को देवी कहीं नहीं दिखी। राघव वॉशरूम में चेक करता है, फिर बालकनी साइड जाता है, मगर देवी वहाँ भी नहीं दिखी।

राघव के चेहरे के हावभाव बदल गए।

नीचे आयुषी गुस्से में थी। वह एक तरफ़ खड़ी होकर कुछ सोच रही थी। इस वक़्त किचन से बाहर देवी निकलती है।

देवी ने अभी भी सुबह वाले कपड़े ही पहने थे। उसकी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, मगर वह अभी भी बहुत ख़ूबसूरत लग रही थी।

उसके बालों में जो गजरा लगा था, वह भी अपनी चमक खो चुका था। देवी इतने सारे लोगों को देखकर अपनी जगह पर रुक जाती है और अपनी मुट्ठी बंद कर लेती है।

वह बिना किसी की नज़र में आए ऊपर जाना चाहती थी।

वहीं आयुषी की नज़र देवी पर पड़ चुकी थी। आयुषी देवी को पहचान नहीं पाई। अचानक उसने एक नौकर को कहते हुए सुना, "छोटी बहू आज बहुत थक गई है।"

दूसरा नौकर डरते हुए बोला, "मुझे बहुत डर लग रहा है। अगर रघु भैया को पता चल गया कि छोटी बहू ने किचन का पूरा काम किया है तो पता नहीं क्या होगा।"

यह सुनते ही आयुषी की आँखों में ख़तरनाक चमक नज़र आई और वह जानलेवा नज़रों से देवी को देखने लगी।

देवी को महसूस हुआ कोई उसे बुरी नज़र से देख रहा है। देवी कसकर अपनी मुट्ठी बंद कर लेती है।

आयुषी अपने मन में बोली, "गायत्री दादी राघव से बहुत प्यार करती हैं। उन्हें राघव की इमेज की बहुत चिंता है। यह लड़की बिल्कुल गाँव की गँवार लग रही है। अगर यह पार्टी में मौजूद सभी की नज़रों में आ जाए तो इसको इस हालत में देखकर सभी इसका मज़ाक उड़ाएँगे, जिससे राघव की इमेज ख़राब होगी। तो गायत्री दादी ज़रूर इसे घर से निकाल देंगी।" यह कहते ही आयुषी खुश हो गई।

देवी छिपकर जाने वाली थी, मगर आयुषी जानबूझकर देवी से टकराती है। आयुषी जानबूझकर वेटर के हाथ में पकड़ी ट्रे को भी गिरा देती है, फिर खुद ज़मीन पर गिर गई।

ट्रे तेज़ आवाज़ के साथ ज़मीन पर गिर गई। सभी का ध्यान आयुषी और देवी की तरफ़ चला गया।

आयुषी मन ही मन शैतानी मुस्कान करने लगी। फिर घबराने का नाटक करके बोली, "मुझे... मुझे माफ़ कर दो! मैंने यह जानबूझकर नहीं किया। प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो। मैं जानती हूँ तुम गुस्सा हो गई हो, पर तुम्हें मुझे नीचे नहीं गिराना चाहिए था।"

आयुषी की आँखों में आँसू थे। आयुषी बिल्कुल एक नाज़ुक फूल की तरह लग रही थी जिसकी रक्षा हर कोई करना चाहता।

अब सभी तेज़ और डरावनी नज़रों से देवी को देखने लगे, जैसे उसने कोई पाप किया हो।

एक औरत गुस्से से आकर देवी को थप्पड़ मार देती है। यह सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया।

देवी को हल्का चक्कर आया और वह बिना भाव के सामने उस औरत को देखने लगी जिसने उसे थप्पड़ मारा था।

गायत्री जी के भाव बदल गए और वह गुस्से से सामने देखने लगीं।

कंटिन्यू…..

आगे जानने के लिए बने रहे।

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