देवी कुएँ के अंदर थी। वह लंबी-लंबी साँसें ले रही थी, वह डूब रही थी।
अचानक राघव भी कुएँ में कूद जाता है। राघव खुद का संतुलन बनाता है और एकदम से देवी की कलाई को पकड़कर उसे खुद के करीब कर लेता है।
उसने देवी की कमर को कसकर पकड़ा हुआ था। देवी को साँस लेने में थोड़ी दिक्कत होने लगी।
उसने अपना सिर राघव के सीने पर रख दिया और अपनी बॉडी को ढीला छोड़ दिया। राघव के चेहरे पर गुस्सा साफ नज़र आ रहा था।
राघव ने महसूस किया, ठंडे पानी के कारण देवी का शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था।
राघव अपना एक हाथ देवी के सिर पर रखकर उसे सहलाते हुए बोला, "दुल्हनिया, हम यहाँ पर हूँ, शांत हो जाओ। डरो मत, हम तुम्हें बचा लेंगे।"
देवी के गुलाबी होंठ काँप रहे थे। देवी ने कसकर राघव की शर्ट को पकड़ लिया था, उसकी पकड़ और भी ज़्यादा मज़बूत हो रही थी।
राघव ने भी कसकर उसे गले लगा लिया। इस बार उसने शांत मगर गहरी आवाज़ में कहा, "डरो मत, हम यहाँ है।"
उसने यह शब्द देवी के कान के पास जाकर कहे थे। देवी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और वह लंबी साँस लेने लगी।
उसने एक शब्द भी नहीं कहा और कसकर अपने होंठों को दबा लिया।
दोनों के कपड़े गीले थे और शरीर एक-दूसरे से चिपका था।
दोनों एक-दूसरे के शरीर से निकल रही गर्मी को महसूस कर पा रहे थे। एक पल के लिए माहौल शांत मगर रोमांटिक हो गया।
राघव अपनी काली गहरी आँखों से देवी को देख रहा था, मगर देवी ने अपनी आँखें बंद की हुई थीं।
राघव लगातार देवी को देख रहा था। वह हल्के-हल्के देवी के गाल को सहलाता है।
उसकी आँखों में पज़ेसिवनेस और सनकीपन साफ नज़र आ रहा था।
वहीं, ऊपर शूरवीर और निशांत, जो घबराए हुए थे, जब नीचे का नज़ारा देखते हैं तो दोनों एक-दूसरे को अजीब नज़र से देखने लगे।
गौरी चिल्ला रही थी, "छोटे ठाकुर, छोटे ठाकुर को बचाओ!"
शूरवीर गुस्से से उसे देखता है और तुरंत उसका मुँह बंद करके अपने एक आदमी को इशारा करता है।
उसका एक आदमी आता है और गौरी को ज़बरदस्ती उठाकर ले जाता है। वहाँ का माहौल थोड़ा शांत हो गया।
शूरवीर अजीब तरह से मुस्कुराकर बोला, "तुम्हें क्या लगता है, रघु भैया को बाहर निकालें या नहीं?"
निशांत उदास होकर बोला, "हे राम, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा! अगर हम निकालेंगे तो कहीं रघु भैया बाद में यह कहकर न पीटें कि हमने उनके रोमांस में खलल डाल दी। और अगर हम नहीं निकालेंगे तो शायद रघु भैया यह कहकर मारेंगे कि हमने उन्हें क्यों नहीं निकाला और मरने के लिए छोड़ दिया।"
निशांत और शूरवीर दोनों ही बहुत परेशान थे। मुखिया जी भी आ गए थे और उनकी पत्नी भी थीं, आसपास मौजूद लोग भी थे, मगर शूरवीर और निशांत ने सभी को शांत कर दिया था।
शूरवीर मुखिया जी को देखकर बोला, "आप डॉक्टर का इंतज़ाम कर दीजिए, हम रघु भैया को निकालने की कोशिश करते हैं।" इतना कहते ही वह तिरछी मुस्कुराहट के साथ निशांत को देखता है।
निशांत सभी को देखकर बोला, "आप लोग जा सकते हैं, हम देख लेंगे सब।" सभी लोग डरकर चले जाते हैं।
वहीं मुखिया जी घबराकर बोले, "लेकिन छोटे ठाकुर!"
इस बार शूरवीर कठोर आवाज़ में बोला, "हमने कहा ना, हम निकाल लेंगे। आप बस डॉक्टर का इंतज़ाम करिए।"
मुखिया जी और उनकी पत्नी घबराते हुए चले जाते हैं।
वहीं राघव ने अब भी देवी को गले लगाया हुआ था।
देवी को महसूस हुआ राघव उसका फायदा उठा रहा है, क्योंकि राघव के हाथ उसकी कमर पर ज़रूर थे, मगर राघव के होंठ देवी की गर्दन पर घूम रहे थे।
देवी को बहुत गुस्सा आया। वह तुरंत राघव को खुद से दूर करके बोली, "शर्म नहीं आती!"
वह तुरंत डूबने लगी।
यह देखकर राघव की आँखों में शिकारी जैसी चमक नज़र आने लगी। इस बार उसने देवी को नहीं बचाया।
देवी डूबने लगी, मगर उसने देखा राघव चुपचाप उसे देख रहा है, तो वह तुरंत उसका हाथ पकड़कर बोली, "क्या आप चाहते हैं मैं मर जाऊँ, ताकि आपको यहाँ कोई नई मधुमक्खी मिल जाए?"
राघव तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला, "दुल्हनिया, तुमने वह कहावत सुनी है — डूबते हुए को तिनके का सहारा? वैसे ही सिचुएशन इस वक्त तुम्हारी है। दुल्हनिया, तुम वही तिनका हो और तुम्हारा सहारा तुम्हारा पति है। इसलिए अच्छी दुल्हनिया की तरह पति की बात सुनो, फिर हम दोनों बाहर होंगे।"
देवी डूब रही थी, उसे साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। राघव अभी भी चुपचाप खड़ा था।
वह बिल्कुल पत्थर दिल लग रहा था। उसके चेहरे के एक्सप्रेशन बहुत कठोर थे।
दो मिनट हो जाते हैं। देवी को लगा वह तो मर ही जाएगी।
तभी राघव के सहारे खुद को खड़ा करते हुए वह गुस्से से बोली, "क्या चाहिए?"
राघव के होंठों पर शैतानी मुस्कुराहट आ गई और वह देवी के कान में बोला, "मुझे किस करो। मैं तुम्हें बचाऊँगा।"
देवी उसकी डिमांड सुनकर हैरान हो जाती है। राघव कठोर आवाज़ में बोला, "बोलो, दुल्हनिया!"
देवी का चेहरा गुस्से से लाल पड़ गया और वह बोली, "किस माय फुट!"
राघव तुरंत उससे दूर हो गया।
देवी फिर से डूबने लगती है।
देवी को राघव बिल्कुल पत्थर दिल लग रहा था, जो उसे बचाने को तैयार नहीं था।
देवी को जब लगा वह मरने वाली है, तो आखिरकार उसने कहा, "ओ... के, ओके।"
राघव एक झटके से उसे बाहों में भर लेता है।
बिना वक्त गँवाए उसके नर्म होंठों को चूम लेता है। उसकी किस बेकाबू हो रही थी। देवी के अंदर ताकत नहीं थी कि अब वह उसे खुद से दूर करे।
शूरवीर यह सब देखकर अफ़सोस से बोला, "बेचारी भाभी, कहाँ फँस गई!"
निशांत बोला, "रघु भैया अपना काम निकलवाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।"
वहीं देवी को अपने होंठों में दर्द हो रहा था। उसका शरीर अकड़ रहा था। उसे ऐसे टच की आदत नहीं थी, इसलिए वह नर्वस होने लगी।
वह राघव को दूर करने की कोशिश करती है, पर अनजाने में राघव की शर्ट के बटन टूट गए।
देवी का हाथ राघव के खुले सीने पर रगड़ गया। राघव काँप गया, पर उसकी आँखों में नज़र आ रहा पागलपन बढ़ गया।
देवी कमज़ोर आवाज़ में बोली, "रा...घव।"
रा
घव आक्रामक होकर देवी की गर्दन को सूँघकर बोला, "दुल्हनिया, हमरा नाम लो।"
देवी गुस्से से बोली, "तु... तुम पागल हो!"
कंटिन्यू...
आगे जानने के लिए बने रहे।




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