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राघव लगभग दस मिनट तक उसे किस करता है।

वहीं शूरवीर और निशांत इंतज़ार कर रहे थे कि कब लव उन्हें इशारा करे और वे लोग उन दोनों को कुएँ से बाहर निकालें। उन दोनों के हाथ में इस वक्त एक मोटी सी रस्सी थी।

देवी तो बेहोश हो गई थी। राघव ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा था।

राघव के होंठ एकदम लाल थे। राघव अपने गीले बालों में हाथ फेरते हुए ऊपर देखता है तो शूरवीर और निशांत उसी को ही देख रहे थे। राघव हाथ से इशारा करता है।

शूरवीर जल्दी से रस्सी को कुएँ के अंदर डाल देता है। गार्ड के साथ-साथ शूरवीर और निशांत ने भी रस्सी पकड़ी हुई थी।

कुछ देर में राघव और देवी कुएँ के बाहर आ जाते हैं। राघव ने तुरंत देवी को अपनी जैकेट से ढक दिया था क्योंकि देवी के पूरे कपड़े गीले हो गए थे, जिस कारण उसकी बॉडी साफ़ दिख रही थी।

राघव उसे ब्राइडल स्टाइल में उठा लेता है और बिना किसी भाव के मुखिया के घर के अंदर चला गया।

जिस रूम में वह पहले रुका था, उसी रूम में वह देवी को लेकर जाता है।

निशांत और शूरवीर उसके साथ थे। राघव बिना भाव के बोला, "जाकर कपड़े लाओ।"

शूरवीर तुरंत चला जाता है और निशांत मुखिया जी के पास चला गया था। राघव और देवी रूम में अकेले थे और राघव ने तुरंत खिड़की बंद कर दी थी।

नवंबर चल रहा था और अब तो शाम होने वाली थी, इसलिए थोड़ी ठंडी ठंडी हवा भी चल रही थी। देवी के पूरे कपड़े गीले थे।

राघव के चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं थे, मगर उसकी आँखें लाल थीं।

वह देवी के करीब जाकर उसकी कलाई को देखता है जिस पर उँगलियों के निशान थे, मगर यह उसके उँगलियों के निशान नहीं थे। इसलिए राघव की मुट्ठी कस जाती है। रूम का तापमान बढ़ने लगा था।

कुछ देर में मुखिया जी, निशांत और डॉक्टर रूम में आ जाते हैं। राघव ने चादर से देवी को ढक दिया था, केवल देवी का चेहरा ही नज़र आ रहा था।

डॉक्टर घबराकर राघव को देखते हुए बोले, "छोटे ठाकुर, मैं आपके इलाज के लिए आया हूँ।"

राघव उसकी बात को इग्नोर करता है और देवी की तरफ इशारा करते हुए बिना भाव से बोला, "हमारी दुल्हनिया का इलाज करो पहले।"

डॉक्टर मुखिया जी को देखने लगते हैं। मुखिया जी सिर हिलाते हैं।

डॉक्टर चादर हटाने लगते हैं तो राघव तुरंत उन्हें रोकते हुए हल्के गुस्से से बोला, "ये तुम क्या कर रहे हो?"

डॉक्टर घबरा जाते हैं फिर जल्दी से बोले, "छोटे ठाकुर, छोटी ठकुरानी का इलाज करने के लिए सबसे पहले हमें उनकी नब्ज़ चेक करनी होगी।"

राघव केवल देवी का हाथ निकाल देता है। डॉक्टर देवी का चेकअप करते हैं और राघव केवल उन्हें ही देखे जा रहा था, जिस कारण डॉक्टर को दबाव महसूस हो रहा था।

थोड़ी देर बाद डॉक्टर घबराते हुए बोले, "छोटी ठकुरानी बिल्कुल ठीक हैं। थोड़ी देर में उन्हें होश आ जाएगा और हाँ, उनके कपड़े जल्द से जल्द बदल दिए जाएँ नहीं तो उन्हें ठंड लग जाएगी।" राघव भौंहें ऊपर करके नाराज़ होकर बोला, "दवा?"

डॉक्टर घबराते हुए बोले, "छोटे ठाकुर, हम दवा लिख देते हैं। अगर छोटी ठकुरानी को होश आने के बाद बुखार आ जाता है तो आप उन्हें दे सकते हैं।"

राघव सिर हिला देता है और तुरंत जाने का इशारा करता है। शूरवीर कपड़े लेकर आ गया था।

मुखिया जी को भी दबाव महसूस हो रहा था। उनकी मौजूदगी से राघव का गुस्सा बढ़ रहा था, इसलिए मुखिया जी रूम के बाहर चले गए। शूरवीर ने राघव के कान में कुछ कहा फिर कपड़े रखकर वहां से चला जाता है।

निशांत रूम में जलता हुआ कोयला रख गया था, जिस कारण रूम का माहौल काफी गर्म हो गया था। देवी का चेहरा जो पहले सफ़ेद पड़ा था, धीरे-धीरे नॉर्मल होने लगता है।

राघव लगातार उसे दस मिनट से देख रहा था मगर उसके चेहरे के भाव एक बार भी नहीं बदले।

पर राघव की आँखों में इमोशंस की लहरें कुछ पल के लिए ज़रूर नज़र आई थीं, मगर जब देवी की उँगलियाँ हिलने लगीं तो राघव की आँखें सख़्त पड़ गईं।

देवी धीरे-धीरे अपनी आँखें खोल देती है। देवी को गले में दर्द हो रहा था और अपने सिर में भी।

वह जब आँखें खोलती है तो सबसे पहले राघव को देखती है जो उसके बहुत करीब बैठा हुआ था और अपनी गहरी आँखों से उसे देख रहा था।

एक पल के लिए देवी घबरा गई मगर जल्दी ही वह शांत हो गई। पर जब उसे याद आया कुएँ में कैसे राघव ने उसे निकालने से मना कर दिया था और उसे किस करने के लिए कहा था तो उसका चेहरा गुस्से से लाल पड़ गया।

वह एक ज़ोरदार थप्पड़ राघव के चेहरे पर मार देती है। राघव का चेहरा एक तरफ झुक जाता है।

उसका चेहरा लाल पड़ गया था। देवी गुस्से में उसे देखते हुए बोली, "आपकी हिम्मत कैसे हुई मेरे पास बैठने की! आपका बस चलता तो आप मुझे जान से मार देते।"

राघव अपने हाथ से अपने गाल को हल्का सा सहलाता है फिर अपनी गर्दन में हाथ डालते हुए ठंडी मुस्कुराहट से देवी को देखने लगा।

देवी अभी भी उसे गुस्से से देख रही थी और राघव एक झटके से उसे अपने करीब करके उसका हाथ अपने दूसरे गाल पर रखता है फिर देवी के कान में बहुत ही डोमिनेटिंग और कर्कश आवाज़ में बोला, "दुल्हनिया, एक तो तुम कह रही हो हम तुम्हारे पास नहीं आ सकते, ऊपर से थप्पड़ मारने के बहाने हमें छू रही हो। अगर छूना चाहती हो तो साफ़-साफ़ बता दो, मना नहीं करेंगे, मगर ऐसे थप्पड़ का बहाना न बनाओ। तुम चाहो तो और छू सकती हो।" इतना कहते ही वह देवी के हाथ को अपने गाल पर पकड़ता है।

देवी को समझ नहीं आया वह क्या बोले। वह इरिटेट होकर बोली, "तुम! तुम सनकी हो! दूर रहो!"

राघव अपनी काली गहरी आँखों से उसे ऊपर से नीचे तक देखता है फिर देवी के गर्दन के पास पानी की बूंदों को अपनी जीभ से सक करते हुए तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला, "तुम इतनी जल्दी होश में क्यों आ गईं? हमने तो सोचा था हम हमरी दुल्हनिया के कपड़े बदलेंगे। एक काम करो, फिर से बेहोश हो जाओ।"

देवी का चेहरा लाल पड़ गया। उसे समझ नहीं आ रहा था वह राघव को क्या बोले क्योंकि राघव बेशर्मी भरी बातें बार-बार कर रहा था।

वह तुरंत राघव को खुद से दूर कर देती है और चादर से खुद को ढक लेती है।

राघव कुछ सोच कर खड़ा हो गया फिर कपड़े की तरफ इशारा करके शरारती मुस्कुराहट के साथ बोला, "हम जानते हैं तुम चाहती हो हम तुम्हारे कपड़े बदलें, लेकिन हम इतने बेशर्म नहीं हैं तुम्हारी तरह। वह क्या है न, हमें बहुत शर्म आती है, इसलिए हम बाहर जा रहे हैं। तुम बदल लो। पर तुम नाराज़ मत होना और हाँ, हमें याद मत करना। हम बाहर ही हैं।" इतना कहते ही वह बाहर चला गया।

देवी स्पीचलेस थी। उसके पास कहने के लिए शब्द नहीं थे।

देवी खुद से बोली, "बेवकूफ! कौन इसे याद करेगा!"

देवी उठती है और जल्दी से अपने कपड़े चेंज करने चली जाती है। उसे अभी गौरी से बदला भी लेना था।

दूसरी तरफ राघव अपनी बंदूक को घुमाते हुए आंगन में बैठा हुआ था। मुखिया जी डरते हुए खड़े थे।

तभी गौरी को वहां पर लाया गया। गौरी घबराई हुई लग रही थी। राघव उसकी तरफ एक नज़र भी नहीं डालता है।

गौरी अपनी घबराहट को शांत करके बोली, "छोटे ठाकुर, आपने कपड़े क्यों नहीं बदले हैं? आपको ठंड लग जाएगी।"

राघव एक शब्द भी नहीं कहता है। उसने अपनी बंदूक को अपनी उँगलियों में घुमाते हुए कर्कश आवाज़ में पूछा, "हमरी दुल्हनिया को कुएँ में किसने फेंका?"

मुखिया जी जल्दी से बोले, "छोटे ठाकुर, मुझे नहीं पता। मैं तो अंदर ही था पर मैं वादा करता हूँ, मैं पता कर दूँगा किसने यह सब कुछ किया है।"

यह सुनकर शूरवीर मुस्कुराते हुए बोला, "रघु भैया, मुखिया जी ने खुद कहा है कि वह उस इंसान का पता लगाएँगे जिसने भाभी को मारने की कोशिश की है, तो मुखिया जी, यह भी बताइए आप उसके साथ क्या करेंगे?"

मुखिया जी तुरंत बोले, "उसने छोटी ठकुराइन को मारने की कोशिश की है! बेशक उसे सज़ा मिलनी चाहिए!"

यह सुनते ही गौरी की दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं।

शूरवीर और निशांत गौरी को देखते हैं, वहीं राघव केवल अपनी बंदूक को देख रहा था।

कंटिन्यू….

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