देवी श्रेया को गुस्से में देख रही थी। श्रेया कन्फ़्यूज़ होकर बोली, "तुम मुझे गुस्से में क्यों देख रही हो? मेरा फ़्लैट 20वें फ़्लोर पर है। क्या तुम चाहती हो मैं तुम्हें नीचे कूद जाने के लिए कहूँ?"
देवी को और भी ज़्यादा गुस्सा आया। वह दाँत पीस लेती है, मगर फिर बालकनी की तरफ़ चली गई। श्रेया की आँखें डर से बड़ी हो गईं।
वह उसके पीछे जाते हुए बोली, "अरे रुको! क्या तुम सच में कूदने वाली हो? नहीं, ऐसा मत करना!"
पर जब तक वह बालकनी में पहुँची, उसने देखा देवी रेलिंग को पकड़कर नीचे वाले फ़्लोर की बालकनी को देख रही थी।
श्रेया घबराकर बोली, "देवी, नीचे आ जाओ! क्या तुम मरना चाहती हो? आख़िर बाहर कौन है जो तुम इस तरह भाग रही हो?"
देवी शांत आवाज़ में बोली, "जब मैं नीचे कूद जाऊँगी, तब तुम दरवाज़ा खोल सकती हो।"
श्रेया गुस्से से बोली, "क्या तुम पागल हो गई हो?"
देवी उसकी बात को नज़रअंदाज़ करके बोली, "मैं मरूँगी नहीं। मैं बस नीचे वाले फ़्लोर की बालकनी में कूदूंगी। चिंता मत करो, मुझे इसका अभ्यास है। बस मेरे बारे में किसी को मत बताना।" इतना कहते ही वह पाइप के सहारे 19वें फ़्लोर की बालकनी में पहुँच जाती है।
श्रेया को कुछ समझ नहीं आ रहा था, आख़िर देवी भाग क्यों रही है? उसने गहरी साँस ली और दरवाज़ा खोलने के लिए चली गई।
दरवाज़ा जैसे ही उसने खोला, वैसे ही निशांत जो दरवाज़ा खोलने के लिए धक्का दे रहा था, एकदम से ज़मीन पर गिर जाता है।
यह देखकर श्रेया दो कदम पीछे हो गई। उसके चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन थे। निशांत जल्दी से उठकर खड़ा हो गया।
उसे थोड़ी सी शर्म आई, मगर फिर उसके चेहरे के भाव कठोर हो गए। उसने आस-पास देखा। श्रेया गुस्से से बोली, "तुम कौन हो और मेरे घर में बिना परमिशन के कैसे आए? यहाँ से निकल जाओ, वरना मुझे पुलिस को बुलाना पड़ेगा।"
निशांत उसकी बात को नज़रअंदाज़ कर देता है। श्रेया गुस्से से बोली, "तुम..."
मगर ठीक उसी वक़्त शूरवीर बंदूक को श्रेया के माथे पर रख देता है। श्रेया बहुत ही ज़्यादा डर जाती है।
उसके मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे। शूरवीर बिना भाव से बोला, "बेहतर होगा मुँह बंद रखो, वरना मैं ज़िंदगी भर के लिए तुम्हारा मुँह बंद कर दूँगा।"
श्रेया डरकर बोली, "तुम... तुम लोग कौन हो?" मगर शूरवीर उसकी बात को नज़रअंदाज़ कर देता है।
श्रेया कसकर अपनी मुट्ठी बंद कर लेती है। डर के मारे अब वह कुछ बोल नहीं पा रही थी।
उसके मन में देवी का ख़्याल आया और वह खुद से बोली, "हे भगवान! क्या ये लोग देवी के पीछे पड़े हैं? पर ये लोग हैं कौन? क्या ये लोग उसे मारना चाहते हैं? नहीं! चाहे जो हो जाए, मैं कभी भी इन्हें नहीं बताऊँगी देवी कहाँ है। अब मुझे समझ आया देवी क्यों इस जगह से भागना चाहती थी। पर उसने इन लोगों को कैसे उकसाया? या फिर हो सकता है, इन लोगों की नीयत ही ख़राब हो।"
श्रेया दाँत पीस लेती है। निशांत पूरे घर की तलाशी लेता है, मगर उसे देवी कहीं नज़र नहीं आई। वह तुरंत फ़्लैट के बाहर गया।
फ़्लैट के बाहर राघव दीवार से टिक लगाकर खड़ा था। उस जगह थोड़ा सा अंधेरा था। राघव के होंठों के बीच सिगरेट दबी हुई थी, जिसके कश वह ले रहा था।
निशांत जल्दी से जाता है और राघव से बोला, "रघु भैया, भाभी अंदर नहीं है।"
यह सुनते ही राघव की आँखों में दिलचस्पी नज़र आई, क्योंकि जब देवी ने दरवाज़ा खोला था, उसी वक़्त राघव ने उसे देख लिया था।
निशांत को थोड़ा डर लग रहा था। वहीं राघव लाइटर को उछालते हुए उसके साथ खेल रहा था। निशांत को समझ नहीं आया आख़िर राघव क्या सोच रहा है।
उसने जल्दी से कहा, "रघु भैया, चिंता मत करिए, भाभी मिल जाएगी। अगर हम नहीं ढूँढ पाएँगे तो क्या होगा? अभिमान भाई की हेल्प ले सकते हैं, वह 5 मिनट के अंदर भाभी को ढूँढ लेंगे।"
राघव अजीब तरह से मुस्कुराया। उसकी मुस्कुराहट ख़ूनी भरी थी। उसकी आँखों में एक ख़तरनाक चमक थी। उसने धीमी मगर कर्कश आवाज़ में बोला, "ऐसा लगता है, दुल्हनिया अभी भी थकी नहीं है।"
इतना कहते ही वह अपनी आँखें बंद कर लेता है। निशांत थोड़ा सा घबराया हुआ था, मगर राघव काफ़ी ज़्यादा शांत था।
निशांत अंदर जाता है। उसने श्रेया को देखकर भारी आवाज़ में कहा, "बताओ, भाभी कहाँ है? अगर तुमने नहीं बताया तो हो सकता है तुम्हारे परिवार वालों को तुम्हारी लाश भी न मिले।"
श्रेया गुस्से से बोली, "कौन भाभी? मैं किसी भाभी को नहीं जानती हूँ।"
निशांत उसे उँगली दिखाकर बोला, "ज़्यादा भोली मत बनो। थोड़ी देर पहले भाभी ने जब दरवाज़ा खोला था, तब हमने उनकी झलक देखी थी। बताओ, वह कहाँ है?"
श्रेया के दिमाग़ ने जैसे काम करना बंद कर दिया था। वह मन में चिल्लाते हुए बोली, "हे भगवान! उस समय मैं उस लड़की से पूछा था कि उसने मंगलसूत्र क्यों पहना है, पर उस बेवकूफ़ ने जवाब नहीं दिया। क्या इसका मतलब यह लोग उसके पति के आदमी हैं? क्या उसने किसी गुंडे से शादी की है? अगर यह बात उसके परिवार वालों को पता चली तो बहुत बड़ा हंगामा हो जाएगा।"
श्रेया को खामोश देखकर निशांत गुस्से से बोला, "तुम चुप क्यों हो? बोलो!"
श्रेया बोली, "मुझे नहीं पता तुम लोग किसकी बात कर रहे हो। यह मेरा फ़्लैट है, मैं यहाँ पर अकेली रहती हूँ।"
शूरवीर अपनी आँखें छोटी कर लेता है। उसने गोली चला दी, मगर गोली सोफ़े में लगी।
श्रेया डर के मारे बेहोश हो गई। यह देखकर निशांत मुँह बनाकर बोला, "कितनी कमज़ोर है यह! अब हम क्या करें?"
शूरवीर तुरंत फ़्लैट के बाहर आ जाता है और राघव को देखकर बोला, "रघु भैया, वह लड़की कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। अब तो वह बेहोश हो गई है।"
राघव अपनी आँखें खोलता है। उसने लाइटर को उछाला और दूसरे हाथ से पकड़ लिया, मगर उसने कुछ भी नहीं कहा।
उसके होंठों पर एक ठंडी मुस्कुराहट थी। उसके जाने के बाद निशांत और शूरवीर भी चले जाते हैं।
दूसरी तरफ़, देवी 19वें फ़्लोर पर जब पहुँच गई थी, तो वह बालकनी से सीधे घर के अंदर जाती है। उस घर में दो बुज़ुर्ग मौजूद थे।
उस वक़्त वह लोग हॉल में बैठकर सब्ज़ियाँ काट रहे थे। देवी किसी पर ध्यान नहीं देती और जल्दी से फ़्लैट के बाहर भाग गई। यह सब देखकर वह बुज़ुर्ग हैरान थे।
बुज़ुर्ग आदमी गुस्से से बोला, "कौन है? क्या तुम चोर हो? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुसने की?"
इतना कहते ही वह गुस्से में अपनी जगह से उठ जाता है और बाहर जाने लगता है, मगर तब तक देवी लिफ़्ट के अंदर जा चुकी थी और लिफ़्ट बंद हो चुकी थी।
जैसे ही लिफ़्ट नीचे फ़र्स्ट फ़्लोर पर रुकती है,
देवी वहाँ से भाग गई। तभी वह गुस्से से बोली, "मैं पैसे लाना भूल गई।"
देवी पलट कर देखती है, फिर दाँत पीसकर बोली, "तुम्हें तो वांट आने पर देख लूँगी। जब से तुम मेरी ज़िंदगी में आए हो, मनहूसियत ने मेरी ज़िंदगी में क़दम रख दिया है, बेवकूफ़!"
देवी भाग जाती है। उसे खुद भी नहीं पता था वह कहाँ तक आ गई है। देवी एक पार्क में चली जाती है, क्योंकि उसे लगा अगर राघव फ़्लैट में उसे न पाकर ढूँढेगा भी तो वह सड़कों पर जाएगा, पार्क में कभी नहीं आएगा।
देवी तालाब के पास खड़ी हो जाती है और अपने घुटने पर हाथ रख लेती है, क्योंकि वह थक गई थी। उसे काफ़ी पसीना आ रहा था।
उसकी साँस फूल रही थी। उसका गला भी सूख रहा था, क्योंकि उसने सुबह कुछ खाया भी नहीं था। देवी एक हाथ अपने सर पर रख लेती है, क्योंकि ज़्यादा भागने के कारण उसके सर में भी हल्का दर्द होने लगा था।
ठीक उसी वक़्त एक पानी की बोतल उसके सामने आई। "क्या तुम थक गई हो? पानी पी लो, फिर भाग लेना।"
पहले तो देवी ने इस आवाज़ पर ध्यान नहीं दिया, उसे पानी की ज़रूरत थी।
उसने पानी की बोतल ली और जैसे ही राहत की साँस लेते हुए सामने देखा, राघव को देखते ही वह एकदम से चौंक गई थी।
ग़लती से उसका पैर फिसल गया और वह तालाब में गिरने लगी। राघव एकदम से उसकी कलाई को पकड़ने वाला था, मगर उससे पहले ही देवी उसके कॉलर को पकड़ लेती है ताकि खुद को गिरने से बचा सके। मगर दोनों ही बदक़िस्मत हैं।
दोनों ही तालाब में गिर जाते हैं। तभी गार्ड भागते हुए आया और चिल्लाकर बोला, "अरे! उस तालाब के अंदर अभी-अभी एक साँप गया है! जल्दी
बाहर निकलो!"
कंटिन्यू….
आगे क्या होता है? क्या देवी और राघव साँप से बच पाते हैं? जानने के लिए बने रहे।
अगर चैप्टर अच्छा लगे तो आप स्टीकर भी दे सकते है।




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